मौसेरे भाई

16 सितम्बर 2021

पूर्व मुख्यमंत्री माननीय हरीश रावत जी – विवादास्पद ढैचा बीज घोटाले को लेकर यह साबित करने में लगे हैं कि उन्होंने राजनैतिक विरोधी होने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत जी को सत्ता में रहते हुए तमाम दबावों के बावजूद क्लीन चिट दी और जेल नहीं भेजा।
माननीय रावत जी यह कहना चाहते हैं कि उन्होने एक सच्चे भक्त की तरह सत्ता में नैतिकता के आधार पर फैसले लिए। उनकी इस बड़प्पन की तारीफ़ होनी चाहिए इस प्रकरण में उन्हें एक तीर से दो शिकार करने का मौका मिल गया। इस प्रकार से उन्हें मर्मांतक चोट पहुंचाने वाले डॉ हरक सिंह रावत को मिल जुलकर धराशाही करने का अवसर दे दिया। अपनी इस तिकड़मी राजनीति व कूटनीति के चलते ही हरीश रावत जी कांग्रेस की राजनीति का चेहरा बने हैं। उनके बयानों में कितनी सच्चाई होती है उनके करीबी तथा उन्हें जानने वाले अच्छी तरह से जानते हैं। स्वर्गीय इंदिरा हृदयेश आज होती तो वो भी इस मामले पर प्रकाश डाल सकती थी भाई किशोर उपाध्याय का दर्द तो हर बार छलक छलक कर बाहर आ ही जाता है। उनके खास सिपहसालार रणजीत रावत भी सार्वजनिक रूप से काफ़ी कुछ कहते रहे हैं। ख़ैर हरी अनंत, हरी कथा अनंता।
पर ढैचा बीज घोटाला या उत्तराखंड के 21 सालों में 56 – 56 घोटालों की चर्चा, इनमें कांग्रेस भाजपा के बीच जुबानी जंग तो खूब हुई पर एक भी मामले में कायदे की जांच तक नहीं हुई । यदि इन मामलों में मुकदमे दर्ज कर जांच होती या अब भी होगी तो क्लीन चिट देने वालों की भी सच्चाई सामने आ जाएगी। पर उत्तराखंड में घपलों घोटालों के अन्दर मिलीभगत और मीडिया में नूरा कुश्ती की परिपाटी विकसित हो चुकी है।
भाजपा नेता त्रिवेंद्र रावत हो या कांग्रेस नेता हरीश रावत या कोई अन्य ये न्यायालय में मुकदमों का सामना करने का साहस करते तो तस्वीर काफ़ी कुछ साफ हो सकती थी। पर ऐसा कभी होगा नहीं।
फिलहाल यदि मैं याद करूं नशा नहीं रोजगार दो आंदोलन से लेकर नानीसार आंदोलन तक उन्होंने 1984 में नशा नहीं रोजगार दो के दर्जनों आंदोलनकारियों पर मुकदमे दर्ज किए जिन्हें 12-13 साल तक ग्रामीणों ने झेला, निर्दोष साबित हुए। नानीसार में जमीन घोटाले में उनकी सरकार ने उत्तराखंड में जमीनों की रक्षा के लिए लड़ रहे सैकड़ों सामाजिक, राजनैतिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों को जेल भेजा उनपर मुकदमे कायम किए और न्यायालयों के फैसले में यह बात दर्ज है कि वे मुकदमे झूठे थे। और आज भी दर्जनों निर्दोष लोग, युवा उनके लगाए झूठे मुकदमों को झेल रहे हैं। इस लिए परम आदरणीय हरीश रावत जी फ़िलहाल कृपा कर भूल से भी जनता का दिल जलाने वाली बातें न करें।
घोटालों के आरोपी बिना जांच पड़ताल के यदि जेलों से बाहर हैं। तो उसका राज़ आप लोगों के बीच की अंदरूनी दोस्ती है।
जमीनें बचाने, गैरसैंण राजधानी बनाने उत्तराखंड के प्राकृतिक संसाधनों को बचाने के लिए संघर्ष करने वाले लोग यदि दमन और उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं तो यह भी आपसी मिली जुली सियासत का ही एक हिस्सा है।
उदाहरण तो खुद नानीसार है। सत्ता में आने के लिए तब भाजपा नेताओं, जिसमें आज के केंद्रीय राज्य मंत्री अजय भट्ट भी हैं, हमारे भगत दा और हमारे स्वर्गीय मित्र प्रकाश पंत जी भी हैं, की पैरवी के बावजूद सरकार ने न तो इस घोटाले की जांच कराई और न ही निर्दोष लोगों पर लगे मुकदमे वापस लिए। जिसका संदेश साफ है मौसेरे भाई आपस में कितना भी लड़ें हैं तो भाई ही।

पी.सी.तिवारी
केंद्रीय अध्यक्ष उपपा